जल संसाधन मंत्री श्री संजय झा जी को मिथिला याद आ गई।

जल संसाधन मंत्री श्री संजय झा जी को मिथिला याद आ गई।

जल संसाधन मंत्री ने बाढ़ राहत कार्य व बाढ़ निरोधक कार्य की समीक्षा की।
प्रशासन एवं अभियंताओं के कार्यों की कि प्रशंसा
ग्रामीण युवकों के सहयोग की की सराहना
अभियंताओं को 15 सितम्बर तक बाढ़ निरोधक कार्य जारी रखने के दिए निर्देश
बाढ़ राहत कार्य के लिए जिला प्रशासन की की प्रशंसा

समाहरणालय अवस्थित अम्बडेकर सभागार में माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार श्री संजय कुमार झा की अध्यक्षता में बाढ़ राहत कार्य व बाढ़ निरोधक कार्य की समीक्षा बैठक की गई।
बैठक को माननीय मंत्री ने सम्बोधित करते हुए कहा कि बाढ़ के दौरान दरभंगा के प्रशासनिक पदाधिकारी, अभियंतागण एवं खासकर दरभंगा के जिला पदाधिकारी को धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने तेजी से बाढ़ राहत कार्य व बाढ़ निरोधक कार्य किए। सामुहिक प्रयास के कारण दरभंगा जिला के बाँध सुरक्षित रहें। जिस तरह से सामुदायिक किचन चलाया गया, बचाव के कार्य किए गए, फूड पैकेट का एयर ड्रॉपिंग किया गया, जरूरतमंदों के बीच पॉलिथिन शीट्स का वितरण कराया गया, मवेशियों के लिए पशु चारा वितरण कराया गया, बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा गया और खासकर कोविड-19 जैसे विपदा की घड़ी में इतनी तेजी से कार्य किए गए वह प्रशंसनीय है। आपदा में मदद तो मिलती है,लेकिन समय पर यदि किसी को मदद मिले तो उसे उल्लेखनीय कार्य कहा जाता है,जो दरभंगा में किया गया।
उन्होंने कहा कि जब मैं विगत वर्ष मंत्री बनकर दरभंगा आया था, उस समय 12-13 जुलाई को लगभग 08 जगह पर बाँध टूट गया था, लेकिन इस वर्ष हमारे अभियंताओं ने प्रशंसनीय कार्य किए हैं और विभाग की छवि बदलने में भी कामयाब रहें। दरभंगा जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा सफ्फर करता है। वर्ष 2007 से देख रहा हूँ, यहाँ पानी 04-04 महीने तक रहता है। समस्तीपुर डिवीजन के अभियंताओं ने इस बार कोविड के रहते हुए भी प्रशंसनीय बाढ़ निरोधक कार्य किए। यदि ऐसा ही काम गोपालगंज में किया जाता तो बाँध को बचाया जा सकता था। यहाँ के अभियंताओं ने रात-रात भर जग कर 01-01 बाँध को इस तरह से बचाया जैसे बॉर्डर पर जवान सीमा को बचाते हैं। अभी तक 1987 के बाढ़ को बेंचमार्क माना जाता है, लेकिन इस बार की बाढ़ ने उसको भी कई जगह (रोसड़ा में) क्रॉस कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी लगातार 01 महीना और चुनौती पूर्ण है, इस बार विभाग की छवि बदली है, लोग पहले इस विभाग को ठेकेदारी का विभाग कहते थे, इस बार मानवता की रक्षा की बात हो रही है कि किस तरह से विभाग के अभियंताओं द्वारा लोगों को बचाया गया। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को जितनी तेजी से जी.आर. की राशि दरभंगा में उपलब्ध कराई गई है, वह काबिले तारीफ है। उन्होंने अभियंताओं को बाढ़ का स्थाई निदान के लिए कोई तकनीकी रास्ता निकालने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि 05ए. और 03बी. जहाँ कमला, कोशी और करेह नदी मिलती है, वहाँ कोई तकनीकी रास्ता निकालना पड़ेगा। हम 15 साल से देख रहे हैं कि प्रतिवर्ष हनुमाननगर में बाढ़ आती है, इसका कोई न कोई हल तो ढूँढना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बाढ़ राहत एवं बाढ़ निरोधक कार्य में ग्रामीणों ने भी अच्छी भूमिका निभाई है। साथ ही राज्य स्तरीय टॉल फ्री नम्बर – 1800-345-6145 की भी अच्छी भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि श्री हरिनाराण सिंह, मुख्य अभियंता,जल संसाधन विभाग को पटना से लाया गया है। 1962 से सिंचाई के लिए नहर का कार्य लंबित है, जिसे पूरा करना है। इस योजना से दरभंगा ग्रामीण, मनीगाछी एवं मधुबनी जिला को काफी फायदा होगा।
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम ने माननीय मंत्री, वरीय अभियंताओं एवं पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए बताया की दरभंगा के पश्चिमी क्षेत्र अधवारा समूह दक्षिणी क्षेत्र बागमती नदी में पानी ओवरफलो करने के कारण बाढ़ से प्रभावित रहा, खास कर के 20-22 जुलाई तक नेपाल एवं दरभंगा में भारी बारिश होने के कारण केवटी, जाले एवं सदर प्रखंड प्रभावित हो गया तथा 24 जुलाई के बाद बागमती बायाँ तटबंध में ओवरफलो होने के कारण हायाघाट व सिंहवाड़ा के 22 पंचायत एवं 76 गाँव प्रभावित हो गए। इसके साथ ही किरतपुर, गौड़ाबौराम, घनश्यामपुर एवं बाढ़ प्रभावित हो गए। वर्त्तमान में 167 पंचायत पूर्ण रूपेण तथा 53 पंचायत आंशिक रूपेण, कुल 220 पंचायत बाढ़ प्रभावित हैं।
उन्होंने ने कहा कि इस वर्ष केवटी एवं सदर प्रखंड भी बाढ़ प्रभावित हो गया जहाँ प्रत्येक वर्ष बाढ़ नहीं आती है। नदी के पेट में रहने वाले लोगों को तत्काल राहत पहुँचाई गयी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 481 सामुदायिक किचन चलाया जा रहा है।
01 अगस्त को 555 सामुदायिक किचेन चल रहा था। कई स्थलों पर पानी घटने के कारण सामुदायिक किचन में क्रमशः कमी आयी है। अभी तक 25 लाख 63 हजार 440 लोगों को भोजन कराया जा चुका है। अभी भी प्रतिदिन 201579 लोगों को रोज भोजन कराया जा रहा है। 43384 परिवारों को पॉलिथिन शीट्स उपलब्ध कराया गया है। ऐसे 23 गाँव जो पानी से घिरे हुए हैं, वहाँ 9910 सूखा राशन पैकेट का वितरण करवाया गया है तथा 25, 26 एवं 27 जुलाई को एयर ड्रोपिंग कर ड्राय फूड पैकेट उपलब्ध कराए गए हैं। सामुदायिक किचन में पंजीकरण कराने वाले के परिवार के लिए खाना घर ले जाने की भी व्यवस्था की गई।
माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा सदर प्रखण्ड के शिशो पंचायत के बाढ़ राहत केंद्र उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, मखनाही का भ्रमण किया गया था, उनके निर्देशानुसार सामुदायिक किचन में तथा राहत कैम्प में कोरोना की जाँच कराई गई है।
कोविड-19 से सुरक्षा व बचाव के लिए सामुदायिक किचन में तथा बाढ़ निरोधक कार्य में मास्क, सैनिटाइजर तथा टेक होम पर भी बहुत जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एन.डी.आर.एफ. की भी बाढ़ के दौरान अच्छी भूमिका रही। जिले में 03 एन.डी.आर.एफ. टीम कार्यरत है, उनके द्वारा असराहा में गर्भवती महिला को गाँव से निकालकर ईलाज कराया गया। सदर प्रखण्ड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फँसे परिवार को बाहर निकाला गया। चन्दनपट्टी में सुपर पावर ग्रिड को तुरंत चालू किया गया। जिससे मोतिहारी, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर को भी बिजली मिलती है।
आधारभूत संरचना में भी एन.डी.आर.एफ. की अच्छी भूमिका रही। इसके अतिरिक्त पानी से घिरे गाँव में सामुदायिक किचन चलाने हेतु गैस सिलेण्डर, आनाज ले जाने का काम भी किया जाता रहा। लोगों के आवागमन की सुविधा के लिए 56 सरकारी एवं 443 निजी नाव चलाए गए। वर्ष 2018 से नाव क्रय करने पर रोक लगी थी। प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग से वार्त्ता कर इसे क्लियर किया गया है, उन्होंने नाव क्रय करने की अनुमति दे दी है, 11 नाव लिया गया है।
बाढ़ एवं पानी में डूबने से 09 लोगों की मृत्यु हुई, जिन्हें एस.ओ.पी. के अनुसार तुरंत 04-04 लाख रूपये अनुग्रह अनुदान राशि का भुगतान किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 28 मेडिकल टीम एवं 51 चिकित्सक लगाकर 85 स्थलों पर स्वास्थ्य शिविर का संचालन किया गया। जहाँ लगभग 11 हजार लोगों का ईलाज किया गया है। पानी को शुद्ध करने हेतु 14 हजार 250 हैलोजन टेबलेट का वितरण कराया गया। मवेशियों के लिए 314 क्विंटल चारा खासकर हनुमाननगर, घनश्यामपुर, सिंहवाड़ा एवं केवटी में वितरण कराया गया। पी.एच.ई.डी. के द्वारा 62 नये चापाकल, 26 शौचालय की संस्थापना की गई। 05 वाटर टैंक, 70 जेरीकैन की माध्यम से पानी पहुँचाया गया। 110 चापाकल की मरम्मति की गई। 165 चापाकल के पानी का शुद्धिकरण किया गया। सभी क्षेत्र में 07 वाटर पम्प भी चलाया गया।
उन्होंने कहा कि दरभंगा जिला में बाढ़ के दौरान इस वर्ष अभियंताओं द्वारा प्रशंसनीय कार्य किए गए हैं और 15 सितम्बर तक इसे जारी रखने की जरूरत है।
मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग द्वारा माननीय मंत्री जी को अवगत कराया गया कि दरभंगा जिला में ज्यादातर जमींदारी बाँध को लेकर समस्या है। 733 किलोमीटर लम्बाई में जमीनदारी बाँध बनी है, जो कई स्थानों पर काफी नीचे है, जिसके कारण गोपलपुर, बहेड़ी, कर्जापट्टी, अधवाड़ा में समस्या रहती है।
उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग का एक डिविजन जिले में कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी के व्हाट्स ग्रुप से भी काफी सहायता मिली और बाढ़ निरोधक कार्य में ग्रामीण युवकों का सर्वाधिक योगदान रहा। उन्होंने कहा कि जमींदारी बाँध के मैनटेनेंश को पंचायतों के अधीन करने पर या लघू सिंचाई विभाग को ट्रॉसफर करने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही ग्रामीण स्तर पर बाढ़ निरोधक सोसाईटी बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दरभंगा बागमती डिविजन के करेह में 16 जुलाई से लगातार बाढ़ निरोधक कार्य किया जा रहा है। कमला-बलान में 02 जुलाई से बाढ़ निरोधक कार्य किया जा रहा है। वर्त्तमान में सभी तटबंध सुरक्षित है, कही-कहीं पानी जमा है। जमींनदारी बाँध में समस्या आ सकती है।
झंझारपुर ब्रीज के निचे डिससिल्टींग का कार्य किया गया है, जिससे काफी हद तक समस्या का समाधान हुआ है। मब्बी से एकमी 10 किलोमीटर तथा मब्बी से सुगीयामा 5.5 किलोमीटर में तटबंध ठीक है, लेकिन नदी के दोनों भाग में पक्कीकरण कर दिया जाए तो और मजबूती आ जाएगी। नहर में 09 स्थलों पर नुकसान हुआ है।
केवटी-गोपालपुर जमींनदारी बाँध अतिक्रमित है तथा बीच में 25 मीटर रेलवे का चौड़ है। गोपलपुर में बाँध नहीं है, रेलवे की जमीन है। 07-08 किलोमीटर जमींदारी बाँध में ऊँचीकरण और मजबूतीकरण की आवश्यकता है।
बैठक में अपर समाहर्त्ता एवं बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल के वरीय अभियंतागण एवं जिला प्रशासन के संबंधित पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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