सीएम विधि महाविद्यालय के  महासचिव एवं संयुक्त सचिव ने त्यागपत्र सौंपा।Aazad news

सीएम विधि महाविद्यालय के महासचिव एवं संयुक्त सचिव ने त्यागपत्र सौंपा।Aazad news

दरभंगा:सीएम विधि महाविद्यालय दरभंगा के छात्र संघ प्रतिनिधि ज्योत्सना आनंद (महासचिव) एवं विकास कुमार ( संयुक्त सचिव) ने महाविद्यालय में डाक द्वारा अपना त्यागपत्र भेज दिया ।तथा उसकी हार्ड कॉपी ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं छात्र कल्याण अध्यक्ष के समक्ष सौंप दी गई । पत्रकारों से बात करते हुए छात्र संघ प्रतिनिधि ज्योत्सना आनंद जो महाविद्यालय में महासचिव के दायित्व पर हैं उन्होंने कहा कि मैं त्यागपत्र इसलिए दे रही हूं क्योंकि सीएम विधि महाविद्यालय में प्रधानाचार्य द्वारा किए गए असंवैधानिक क्रियाकलाप नामांकन में अनियमितताएं महाविद्यालय में शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने में अथवा महाविद्यालय में संप्रदायिक माहौल बनाने का प्रयास बार-बार प्रधानाचार्य द्वारा किया जाता रहा। और महासचिव ज्योत्सना आनंद ये भी कहां कि छात्र संघ को महाविद्यालय प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की सूचना नहीं मिलती है चाहे वह नामांकन संबंधी हो , परीक्षा संबंधी हो अथवा महाविद्यालय के विकास, रखरखाव या अन्य किसी भी प्रकार की सूचना से छात्र संघ से वंचित रखा जाता है यू कहे तो छात्र संघ को बिल्कुल नजरअंदाज किया जा रहा है महाविद्यालय में इस प्रकार का माहौल है कि कोई भी छात्र उनकी गतिविधि के खिलाफ बोलना नहीं चाहते हैं चाहे वह छात्र संघ प्रतिनिधि क्यों ना हो। वहीं दूसरी ओर सीएम विधि महाविद्यालय के संयुक्त सचिव विकास कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सीएम विधि महाविद्यालय ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की विधि की एकमात्र अंगीभूत इकाई है। परंतु महाविद्यालय के प्रधानाचार्य न जाने क्यों महाविद्यालय के शैक्षिक वातावरण को हमेशा बिगाड़ने का प्रयास करते रहते हैं इतना ही नहीं जब एलएलबी प्रथम खंड में नामांकन प्रक्रिया के दौरान इनके इशारे पर कई अनियमितताएं हुई हैं जैसे बीसीआई की निर्देशानुसार महाविद्यालय में 300 छात्रों का नामांकन होना था लेकिन उस को ताक पर रखते हुए इन्होंने 329 नामांकन लिए तथा अनियमितता यहां तक नहीं रुकी क्योंकि हमारी महाविद्यालय में मेधावी छात्रा भी छात्रों की सूची अंक के आधार पर की जाती है उसके बाद नामांकन होती है लेकिन जब महाविद्यालय में प्रथम मेधा सूची निकाली गई उसमें 171 (लगभग) छात्रों का नाम आया फिर दूसरी मेधा सूची निकाली गई जिसमें 83 छात्रों की सूची निकाली गई है दोनों मेधा सूची में कुल 254 छात्रों के नाम आए हैं प्रधानाचार्य द्वारा कहा गया कि तीसरी मेधा सूची निकलेगी तब और छात्रों का नामांकन होगा छात्र बार-बार पूछते रहे कि मेधा सूची कब निकलेगी परंतु प्रधानाचार्य द्वारा टालमटोल किया जाता रहा करीब 1 सप्ताह के पश्चात प्रधानाचार्य ने कहा की कुल सीटों पर नामांकन हो चुकी है परंतु तीसरी मेघा सूची आज तक निकाली ही नहीं गई वह अपने मन मुताबिक अपने हिसाब से नियम और कानून को ताक पर रखते हुए करीब 75 छात्रों का नामांकन अवैध रूप से लिया गया है।इस नामांकन की अनियमितताओं के संबंध में पूर्व में भी छात्रों, छात्र संगठन एवं छात्र संघ प्रतिनिधि द्वारा विश्वविद्यालय में कई बार ज्ञापन सौंपा भी गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन उस समय इस अनियमितताओं को देखने के लिए एक जांच टीम का गठन किया लेकिन उस जांच टीम के गठन को ठंडे बस्ते में रख दिया गया जिसका कोई अता पता अब तक नहीं चल पाया है मुझे यह पूर्ण संभावना लगती है कि इसमें महाविद्यालय प्रशासन लेख से लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का मिलीभगत है इस नामांकन की अनियमितताओ में या एक उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार का मामला है इसकी गहन जांच की आवश्यकता है। अगर इस अनियमितता की जांच
विश्वविद्यालय प्रशासन करने में सक्षम नहीं है तो हम बिहार के राज्यपाल से निवेदन करते हैं है कि इस मामले की गहन जांच करने की कृपा करें।
इतना ही नहीं इनका मनमाना यही नहीं रुकता महाविद्यालय में जो भी रखरखाव नए आधारभूत संरचना हैं तथा विकास का जो भी काम होता है इसकी कोई निविदा या उसका नोटिस छात्र संघ को छात्रों को मिलता है नहीं इसकी इसकी विज्ञापन या सूचना समाचार पत्र के माध्यम से भी जानकारी नहीं मिल पाती है यह अपने करीबी लोगों को उसकी निविदा दे देते हैं अगर जिस को निविदा देते हैं कि नियम के आधार पर उनको दिया गया है उसका क्या प्रक्रिया था यह भी किसी को नहीं पता चलने दिया जाता है।2 साल से छात्रों एवं छात्र संघ के प्रतिनिधियों द्वारा बार-बार मांग किए जाने पर स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है महाविद्यालय में जो भी कौशल हिना शिक्षक क्या शिक्षिका है उनके बदले में कौशल पूर्ण अस्थाई शिक्षक की नियुक्ति जल्द से जल्द कराने के लिए कई बार मांग उठाई जा चुकी है पर प्रधानाचार्य इस मुद्दे को बार बार नजरअंदाज कर देते हैं। महाविद्यालय में एनएसएस का किसी प्रकार से क्रियाकलाप या कोई भी कार्यक्रम बिल्कुल नहीं किया था अरे यहां शिथिल छोड़ दिया गया। जब महाविद्यालय के छात्रसंघ प्रतिनिधियों का यह हाल है तो महाविद्यालय के आम छात्रों के साथ कैसा रवैया प्रधानाचार्य महोदय द्वारा किया जाता होगा। कुछ महीने पूर्व महाविद्यालय के मुख्य द्वार को केंद्र में रखकर प्रधानाचार्य द्वारा महाविद्यालय में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का उन्होंने पूर्ण प्रयास किया जिसमें कुछ हद तक वह सफल भी हुए।इसके पूर्व में भी प्रधानाचार्य पर कई प्रकार के भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोप लग चुके हैं जिस कारण पहले भी उन्हें प्रधानाचार्य के दायित्व से हटाया गया था और इनके कारण कई वर्षों तक या महाविद्यालय बंद रहा और आम छात्र विधि की शिक्षा ग्रहण करने से कई वर्षों तक वंचित रहे।
इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन से निवेदन है कि इन सभी बिंदुओं पर विचार करके इन सभी मुद्दों पर गहन जांच की प्रक्रिया को अभिलंब शुरू करने का कृपा करें अगर विश्वविद्यालय प्रशासन इस में सक्षम नहीं है तो राज्यपाल महोदय इसमें हस्तक्षेप करके इस विधान जांच कराने की कृपा करें।
महाविद्यालय में आगामी होने वाले नामांकन एलएलबी प्रथम खंड सत्र 2020 -21 में फिर से कोई अनियमितता इनके द्वारा किया जा सकता है। इसकी पूर्ण संभावना है।

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