MSU मधुबनी  इकाई के द्वारा मखाना का नाम  चुराने की साजिश  को लेकर रोष प्रकट किया गया।

MSU मधुबनी इकाई के द्वारा मखाना का नाम चुराने की साजिश को लेकर रोष प्रकट किया गया।

मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने 3 मुद्दों को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की। जिन में मिथिला मखान का नाम चुराने की साज़िश
,कलुआही थाना अंतर्गत हुई जघन्य बलात्कार पर प्रशासन की नाकामी एवं आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता दल द्वारा माफिया, अपराधियों और फ़र्ज़ी डिग्रीधारी नौकरशाहों को उम्मीदवार बंनाने के विरोध में।

मिथिला मखान पहचान व अस्मिता के साथ साथ सीधा एक व्यापारिक और आर्थिक हितों से जुड़ा मामला है।
जीआई टैग का मतलब है ज्योग्राफिकल इंडीकेशन, ये किसी प्रोडक्ट को मिलने का मतलब होता है की वो प्रोडक्ट एक खास क्षेत्र में खास तरीके से उत्पन्न होता है और पर उस क्षेत्र का खास अधिकार है। जीआई टैग मिलने से उस प्रोडक्ट पर क्षेत्र को लीगल राइट्स मिलता है। यदि इसका जीआई टैग “मिथिला मखान” नाम से लिया जाता है तो इस पर मिथिला क्षेत्र का अधिकार होगा। इसे उपजाने व प्रोसेस करने की विधि वो मानी जाएगी जो मिथिला क्षेत्र में उपयुक्त होती है। इससे मिथिला के किसानों, व्यापारियों को फायदा होगा।
इसको इस तरीके से समझिए की जीआई टैग मिलने के बाद “मिथिला मखान” अपने आप में एक प्रॉडक्ट हो जाएगा। इसकी ब्रांडिंग होगी तो लोग देशभर में इसे इसी नाम से जानेंगे। अब जैसे लीची देशभर में हर जगह उपजता है लेकिन एक्सपोर्ट होने वाला शाही लीची मुज़फ्फरपुर में ही उपजता है क्योंकि शाही लीची के नाम पर जीआई टैग है। या यूं कहिए की शाही लीची उसी लीची को कहते हैं जो मुजफ्फरपुर के खास क्षेत्र में उपजता है। एक और उदाहरण, पान हर जगह उपजता है लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में एक्सपोर्ट होने वाला मगही पान उसी पान को कहते हैं जो मगध में खास तरीके से उपजाया जाता है। जीआई टैग मिलने के बाद मखान भी अन्य किसी भी जगह उपज सकता है लेकिन “मिथिला मखान” उसी मखान को कहेंगे जो मिथिला क्षेत्र में उपजा है। ठीक से ब्रांडिंग होने पर विदेशों में एक्सपोर्ट होने अथवा अन्य व्यापारिक कामों में मिथिला मखान ही स्थापित हो जाएगा। इससे मिथिला क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों को फायदा होगा। मिथिला मखान के जीआई टैग के बाद मखान संदर्भ में केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी सेंट्रलाइज्ड वे में मिथिला क्षेत्र के किसानों को ही मिलेगा। भविष्य में मखाना मार्केट, क्लस्टर बेस्ड एग्रीकल्चर सहित अन्य अनेक व्यापारिक हितों में मिथिला मखान नाम से जीआई टैग बेहद लाभकारी हो सकता है।
ये कोई संयोग नहीं है की कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने मखाना के व्यापारिक ब्रांडिंग संदर्भ में विशेष पैकेज की बात की और आज अचानक बिहार मखाना नाम से जीआई टैग हथियाने की कोशिश हो रही है। ये सब दूर का व्यापारिक हित साधने की कोशिश है।
मखान जीआई टैगिंग सिर्फ पहचान और अस्मिता से जुड़ा प्रश्न ही नहीं है बल्कि इसका सीधा संबंध विकास और व्यापारिक हित से जुड़ा हुआ है। आप समझने का प्रयास कीजिए की कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार ने मखान संबंधित करीब 10 हजार करोड़ फंड की बात की थी और अचानक से ये जीआई टैगिंग की बात शुरू हो गई। कारण स्पष्ट है कि आगे आने वाले दिनों में केंद्र सरकार मखान के वैज्ञानिक खेती सहित प्रोसेसिंग आदि के व्यापारिक फैलाव पर विभिन्न योजनाएं लानी वाली है। बिहार सरकार जानती है कि यदि जीआई टैगिंग मिथिला मखान के नाम से हो गया तो सारा पैसा मिथिला क्षेत्र में ही खर्च होगा। वहीं यदि टैगिंग बिहार मखाना के नाम से हो गया तो नीतीश कुमार इसकी खेती और प्रोसेसिंग प्लांट आदि गया, नालंदा आदि जिलों में भी आसानी से लगवा सकते हैं। यहीं हमारा विरोध है। की यदि मखान मिथिला का मूल फसल है तो इससे संबंधित सारी योजनाओं का पैसा मिथिला में खर्च होना चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि जीआई टैगिंग बिहार मखाना के नाम पर ना होकर मिथिला मखाना के नाम पर हो।

सबसे महत्वपूर्ण ये है की मिथिला का एक अलग सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक पहचान है इसे बिहार सरकार माने। मिथिला के अस्मिता और पहचान से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं। चाहे मामला मखान का हो या मैथिली को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करवाने की हो अथवा मैथिली द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता की बात हो। मैथिल अब इन मुद्दों पर चुपचाप बैठकर सरकारी राजाज्ञा जाप नहीं करेंगे। उत्तर बिहार जैसे सरकारी शब्दों को हम नहीं जानते। हम मिथिला के हैं, मैथिल हैं, मैथिली हमारी भाषा है, हमारा एक अलग इतिहास और संस्कृति है।
मिथिला अथवा मैथिली की बात करना अलगाववादी नहीं है। किसी को मिथिला अथवा मैथिली से समस्या हो रही है, ये अलगाववादी बात है। बिहार नाम का शब्द ही 114 साल पुराना है, उसके सामने कोई चाहता है की हम हजारों साल पुराने मिथिला को भूल जाएं तो ये सोच अलगाववादी है।
सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की उनका कहना है कि मिथिला के विकास के बिना बिहार का विकास संभव नही है, फिर यह कैसी साज़िश है मिथिला की अस्मिता के साथ खिलवाड़ की।

एमएसयू के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रियरंजन पांडेय ने कहा कि इस मुद्दे पर हमारे संगठन की तरफ से सबौर विश्विद्यालय के कुलपति को पत्र भेज आपत्ति जताई जा चुकी है संग संग #StopStealingMithilakaMakhan को बीते 24 अगस्त को ट्विटर टॉप ट्रेंड करा पूरे देश को यह बताया गया कि मिथिला मखान सिर्फ मिथिला का है, कोई और इसके नाम की हकमारी नही कर सकता।अगर सरकार इससे भी नही चेती तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलित होंगे और इसके बाद होने वाली तमाम जवाबदेही बिहार सरकार की होगी।
वही जिलाध्यक्ष विजयश्री टुन्ना ने कहा कि कलुआही थाना अंतर्गत मलमल में हुई जघन्य बलात्कार पर प्रशासन की नाकामी और चुप्पी चिंताजनक, हास्यास्पद और बेहद निंदनीय है। उन्होंने इससे पूर्व भी कलुआही थाना प्रभारी को इस घटना में जमकर फटकार लगाई थी और अब जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 1 हफ्ते में सभी दोषियों की गिरफ्तारी नही हुई तो कलुआही थाना का भीषण घेराव होगा और जनता के आक्रोश का बांध टूटने की जवाबदेही और जिम्मेदारी पूर्ण रूप से प्रशासन की होगी।
प्रदेश प्रवक्ता सशी अजय झा जी ने कहा कि msu ने अपने पिछले राष्ट्रीय अधिवेशन में घोषित नव संकल्प नव विकल्प के तहत कार्य शुरू कर दिया है और आगामी विधानसभा में इसका असर दिखेगा। साथ ही साथ उन्होंने चेताया कि हर राजनीतिक दल ने क्षेत्र विकाश को अवरुद्ध करते हुए अपराधी प्रवृति के लोगो को मैदान में उतारा है और इस बार सुनने में आ रहा कि वर्तमान सरकार में रहे तमाम भ्रष्ट नौकरशाहों और फ़र्ज़ी डिग्रीधारी अधिकारियों को पैसे और बाहुबल के दम पर टिकट बेच चुनाव में उतारने जा रही, जिन्हें हर हाल में क्षेत्र में नही आने देगी एमएसयू क्षेत्र में लूट खसोट और सरकारी योजनाओं का बंदरबांट करने के लिए और उन्हें हराने के लिए एड़ी चोटी का जोड़ लगा कर परास्त किया जाएगा।

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