दरभंगा के जाले प्रखंड में 3 कथित फर्जी शिक्षक पिछले 10 सालों से मजे से वेतन उठा रहे हैं। Aazad News

जाले प्रखंड में 3 कथित फर्जी शिक्षक पिछले 10 सालों से मजे से वेतन उठा रहे हैं। 5 साल पहले ही जाले के तत्कालीन बीडीओ महेश चंद्र ने अपनी जांच रिपोर्ट में अभ्यर्थी उमेश कुमार की अनदेखी कर 3 शिक्षकों के अवैध नियाेजन का मामला उजागर कर दिया था। लेकिन अबतक पदाधिकारियांे ने उनकी 3 पेज की जांच रिपोर्ट में उल्लेख की गई सभी अनियमितताओं काे नजरअंदाज कर बैठे हैं। असली अभ्यर्थी उमेश कुमार न्याय के लिए दर दर की ठाेकरें खा रहे हैं। इस बीच सत्यनारायण गुप्ता को हटाकर उमेश कुमार को 3 जुलाई 2011 को नियोजन से नियुक्ति पत्र मिला।

5 महीना 5 दिन बतौर शिक्षक काम भी किया। लेकिन बाजी सत्यनारायण गुप्ता ने फिर मार ली। अब यहां सवाल उठता है कि यदि उमेश कुमार का दावा गलत था तो सत्यनारायण गुप्ता को पद से क्यों हटाया गया। जाले प्रखंड की मुरैठा पंचायत में 3 शिक्षकाें का नियोजन 2010-11 में हुआ था। इन शिक्षकांे के फर्जी नियाेजन होने की पुष्टि 2015 में जाले के तत्कालीन बीडीओ ने अपनी जांच प्रतिवेदन में की थी। बीडीअो ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि आवेदक उमेश कुमार का सबसे अधिक अंक होने के बावजूद सामान्य कोटि में शिक्षक पद पर नियोजन को नजरअंदाज किया गया। जिन 3 शिक्षकाें का चयन हुआ उसमे रोस्टर बिन्दु के पालन की अनदेखी की गई है।

प्रखंड से लेकर जिलास्तर तक रिपाेर्ट काे दबाकर बैठे हैं पदाधिकारी

2008 में शुरू हुई थी नियाेजन की प्रक्रिया 
पंचायत सचिव ने पक्षपात रवैया अपनाते हुए मेधा सूची से उनका नाम गायब कर दिया। उमेश कुमार अपनी शिकायत लेकर डीईओ के पास पहुंचे। डीईओ ने भी फटकार लगाते हुए सत्यनारायण गुप्ता का नियोजन रद्द करते हुए फिर से काउंसिलिंग कराकर उच्च अंक वाले आवेदक का नियोजन करने का आदेश जारी किया। 3 जुलाई 2011 को उमेश कुमार को प्राथमिक विद्यालय इन्दिरा आवास भिरोहा मुरैठा में शिक्षक पद के लिए चयन किया गया। 6 जुलाई को उमेश कुमार ने नियोजन पत्र के साथ स्कूल में योगदान किया। 5 महीना 5 दिन ड्यूटी करने के बाद पंचायत सचिव ने अक्टूबर 2011 को पत्र जारी करके शिक्षक उमेश कुमार की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।

डीपीओ स्थापना को कार्रवाई करने का दिया गया है आदेश: आरडीडीई
क्षेत्रिय शिक्षा उपनिदेशक सतेंद्र झा ने कहा कि उनकी ज्वाइनिंग के कुछ ही दिनों बाद मामला संज्ञान में आया था। कार्रवाई का आदेश दिया था। अब तक उस संबंध में कोई प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। पत्राचार किया जाएगा।
बीडीओ खुद सक्षम हैं, मामला फर्जी है तो कार्रवाई करें: डीईओ

जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. महेश प्रसाद सिंह ने कहा कि पंचायत या प्रखंड शिक्षकांे पर कार्रवाई करने में बीडीओ खुद सक्षम हैं। यदि शिक्षकांे का नियोजन संदिग्ध था तो रद्द कर देते। रही बात शिक्षकों के वेतन भुगतान की तो इसका अधिकार भी बीडीओ के पास है।

डीईओ से आदेश लेकर वेतन पर रोक लगाई जाएगी : डीपीओ स्थापना
डीपीओ स्थापना विजय कुमार भगत ने कहा कि बीडीओ काे संदिग्ध शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए लिखा गया है। पत्र का जवाब अबतक नहीं मिला है। इस मुद्दे पर डीईओ से वार्ता करने के बाद शिक्षकांे के वेतन पर रोक लगा दिया जाएगा।

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