समलैंगिक: लाना था दामाद ,ले आई बहू। सुरक्षा की गुहार में पति-पत्नी बने दोनों लड़की पहुंची थाने।

बेतिया। देश के बड़े बड़े शहरों के बाद अब छोटे शहरों में भी समलैंगिक विवाह का प्रचलन बढ़ने लगा। अबतक सिर्फ बड़े शहरों में ही इस तरह के मामले सामने आते थे लेकिन अब छोटे जगहों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला बेतिया का है। बेतिया में एक मामला सामने आया जिसे देखकर पुलिस वाले भी हैरान हो गए। दरअसल नगर थाना में देर शाम दो लड़की पहुंची। अपने को पति-पत्नी बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाने लगी।

दोनों लड़कियों ने बताया कि जालंधर के न्यायालय में  समलैंगिक विवाह की

दोनों लड़कियों ने बताया कि उन्होंने समलैंगिक विवाह जालंधर के न्यायालय में की। दोनों एक-दूसरे के बगैर नहीं रह सकते। लेकिन उनके परिवार वाले इस रिश्ते को मानने से इन्कार कर रहे हैं। जिसपर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पत्नी के घरवालो से पूछताछ की तो लड़की के घरवालों ने अपनी बेटी से किसी भी तरह का रिश्ता रखने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों प्रेमी युगल को रामनगर स्थित पति के घर पर भेज दिया।

घरवालों के विरोध को देखते हुए पति-पत्नी बने दोनों लड़की नगर थाने पहुंची 

बेतिया की रहने वाली इसरत के पिता हजरत ने बताया कि उनका परिवार जालंधर में रहता था वहीं पड़ोस में बगहा के रामनगर की रहने वाली नगमा खातून भी रहती थी और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। हालांकि घरवालों ने दोनों को समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन दोनों एक-दूसरे के साथ जीने-मरने को तैयार थी। वहीं घरवालों के विरोध को देखते हुए पति-पत्नी बने दोनों लड़की नगर थाने पहुंची जहां पुलिस ने जांच पड़ताल की। नगर थानाध्यक्ष राकेश कुमार भाष्कर ने बताया कि नगमा व उसकी पत्नी इसरत को रामनगर स्थित उसके घर पर पुलिस की सुरक्षा में भेज दिया।

छोटे से शहर में ऐसी घटना को देखकर पुलिस के साथ-साथ आम लोग भी हैरान हैं

ऐसे में देखना होगा कि अब पति बनी नगमा के घरवाले अपनी बेटी की बहू को स्वीकार करते हैं या फिर समलैंगिक विवाह करने वाले इस प्रेमी जोड़े के प्यार की नाव कहां तक पहुंचती है। लिहाजा बेतिया जैसे छोटे से शहर में ऐसी घटना को देखकर पुलिस के साथ-साथ आम लोग भी हैरान हैं और इस रिश्ते को गलत बता रहें हैं यह अलग बात है कि कोर्ट ने इस तरह के संबंध को मान्यता दे दी लेकिन सामाजिक स्तर पर अभी भी समलैंगिंक विवाह करने वाले लोगों के लिए राह आसान नहीं है।

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